बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय!

अच्छाई बाहर नहीं होती, अच्छाई आप स्वयं के अंदर होती है...
जो स्व-दर्शी है, उसे हार जीत का न अनुभव है और न ज्ञान है ...
दिलों की धड़कन भी साथ छोड़ देती है
 जब अपेक्षाएँ बढ़ जाती हैं 
आर के सिन्हा

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