अपनी चित्त की सुनो।

अपनी खुशियों की चाभी किसी दूसरे को सुपुर्द न करें !
हर समस्या का निराकरण स्वचिंतन और मनन से सम्भव है, समस्या बिकराल तब होती है जब हम उलझते हैं "लोग क्या कहेंगे "
सुबह की राम राम जी 🙏 

आर के सिन्हा

Comments

Popular posts from this blog

सत्यसंग

नर- पशु अन्तर