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बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय!

अच्छाई बाहर नहीं होती, अच्छाई आप स्वयं के अंदर होती है... जो स्व-दर्शी है, उसे हार जीत का न अनुभव है और न ज्ञान है ... दिलों की धड़कन भी साथ छोड़ देती है  जब अपेक्षाएँ बढ़ जाती हैं  आर के सिन्हा

नर- पशु अन्तर

🙏🙏 शुभकामनाएं! मनुष्य कल्पना शील है, अन्य प्राणी नहीं... मनुष्य कल्ह की  कल्पना करता,अन्य प्राणी नहीं... मनुष्य प्रगति करते हुए सितारों तक पहुंच बना ली, अन्य प्राणी नहीं... कल्पना शक्ति ही मानवी शक्ति का मूल श्रोत है, तो क्यों हम सभी कल्पना तो करते हैं परंतु उन्हें कल्ह पर टाल देते हैं? कल्ह कभी आता नहीं, यह समझ जिसे आ गया  वही मानव अपने जीवन को साकार किया... उठो, वही कल्ह है जिसके बारे में कल्ह सोंचे थे, वो आज बनकर आ गया... कल्पना के पंखों पर सवार आज उड़ चलो, हर खुशी, हर सफलता तुम्हारे कदमों में है... आप का हर पल मंगल मय हो... RK Sinha  प्रणाम!

सत्यसंग

🙏आपके विचार ही आपके जीवन का निर्माता हैं!शुबह की बेला में अच्छे विचारों का चिंतन मनन करें और आदान-प्रदान करें...आपका हर पल मंगलमय हो..👍🙏

अपनी चित्त की सुनो।

अपनी खुशियों की चाभी किसी दूसरे को सुपुर्द न करें ! हर समस्या का निराकरण स्वचिंतन और मनन से सम्भव है, समस्या बिकराल तब होती है जब हम उलझते हैं "लोग क्या कहेंगे " सुबह की राम राम जी 🙏  आर के सिन्हा

Body commands mind. Maintain your body.

🙏Govern your body to govern your mind...👍 Have ... a deep breath.  a Big smile.  broad shoulders. straight spine.  chin up. This will never allow you to go in worry/negative state of your mind. RK SINHA 

हमको हमसे जो परिचय करादे वही गुरू है।

हम लोगों की संस्कृति से सदियों खिलवाड़ की गयी, नतीजा!बहुत से गुरु के जगह गुरु घंटाल पैदा हो गए और उन्होंने आम लोगों को बरगलाया कि तुम  सभी मेरे (गुरु) चरणों में पड़े रहो...और निम्न श्लोक का अर्थ अपनी सुविधा अनुसार किया कि गुरु सर्वोत्कृष्ट सर्वोपरि है, उनके चरणों में समाहित रहो...यथा... गुरुब्रम्हा गुरुविष्णु गुरुदेवो महेश्वरः । गुरु साक्षात परब्रम्हा तस्मै श्री गुरुवे नमः ।।  वास्तविक अर्थ... गुरु वह है...जो खुद से खुद को परिचित करा दे! अर्थार्त...  हम स्वयं ब्रह्म हैं, हम स्वयं विष्णु हैं, हम स्वयं ही महेश्वर हैं (हम सृजन करते हैं, हम पालन भी करते हैं और हम अपने सृजन पर नियंत्रण भी रखते हैं) तो सही अर्थ है, कि गुरु वह है जो हम से हम को मिला दे lol अथ...संत कबीर ने अपने अंदाज में लोगों को सचेत किया...सादर नमन है, इस मार्ग दर्शक को...प्रणाम [07/12, 21:08] R K Sinha: जाका गुर भी अंधला, चेला खरा निरंध। अंधा अंधा ठेलिया, दून्यूँ कूप पड़त ।।                                       ...